जम्मू शहर में गोल मार्केट, सराजा ढक्की लक्ष्मी नारायण मंदिर आदि जगहों पर लोगो ने कलश यात्रा निकालकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की। इसके साथ ही लोग अपने घरों में भी भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना करेंगे।

News jungal desk: गणेश चतुर्थी पर मंगलवार के दिन ऋद्धि-सिद्धि के दाता गणपति बप्पा भक्तो के घर पधार रहे है। 10 दिन तक गणेशोत्सव शहर में धूमधाम और उत्साह से मनाया जाएगा। इसको लेकर बहुत तैयारियां की जाती है। मंदिरों से लेकर घरों तक लोग गणपति बप्पा का स्वागत करने के लिए व्याकुल है । सोमवार को उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने गणेश चतुर्थी पर लोगों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह त्योहार बुद्धिमत्ता के देवता भगवान गणेश के जन्म का प्रतीक है, जो सभी क्षेत्रों के लोगों को एक साथ लाता है।
जम्मू शहर में गोल मार्केट, सराजा ढक्की लक्ष्मी नारायण मंदिर आदि जगहों पर लोगो ने कलश यात्रा निकालकर गणेश की प्रतिमा स्थापित की । इसके अलावा लोग अपने घरों में भी भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना भी करते हैं। गांधीनगर के गोल मार्केट में 2 बजे से 16 फुट ऊंची गणेश की प्रतिमा प्रतिष्ठापित की जाएगी। उत्सव को लेकर सभी तैयारियां हो चुकी हैं।
गणेश चतुर्थी पर शहर में सबसे बड़ा आयोजन गांधीनगर के गोल मार्केट में हो रहा है। जिसके लिए यहाँ पर 35 फुट ऊंचा पंडाल तैयार किया गया है। मूर्ति स्थापना का कार्यक्रम सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक होगा। इसके साथ ही 10 दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत हो जाएगी। पंडाल को रंग-बिरंगी लाइटों और फूलों से सजाया गया है।
भारतीय वैदिक संस्थान के अध्यक्ष संजय शास्त्री ने बताया कि पंडाल पूरी तरह से तैयार हो गया है। मुंबई से 16 फुट ऊंची प्रतिमा भी पहुंच चुकी है। इस बार बड़े स्तर पर कार्यक्रम होना है। सराजा ढक्की में गणेशोत्सव को लेकर तैयारियां पूरी हो गई हैं। बताया जा रहा है की यहां पर 12 फुट ऊंचे पंडाल का निर्माण किया गया है। जिसमे छह फुट ऊंची भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। आयोजक सनी ने बताया कि सुबह 10 बजे से 12 बजे तक मूर्ति स्थापना होगी। प्रतिदिन सुबह और शाम नौ बजे आरती होगी और इसके साथ ही बुधवार से यहां प्रतिदिन लंगर लगाया जाएगा।
यहां दिखती है महाराष्ट्र संस्कृति की झलक
सराजा ढक्की में हो रहे गणेशोत्सव को लेकर आयोजक सन्नी ने बताया कि पिछले 19 साल से यहां पर गणेशोत्सव मनाया जाता रहा है। रविवार को महाराष्ट्र की संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। झांकी के लिए हर साल महाराष्ट्र से बैंड मंगवाया जाता है। इस बार हम महाराष्ट्र की प्रसिद्ध झांज पतंग (ढोल का एक प्रकार) मंगवा रहे हैं। इसमें 45 लोगों की एक टीम होती है, जो इसे बजाते हैं। झांकी के लिए सबसे आगे डोगरा बैंड होता है। 28 को झांकी निकाली जाएगी। महाराष्ट्रीयन पगड़ी बांधने के लिए खास महाराष्ट्र से लोग बुलाए जाते हैं। झांकी में महिलाएं, बच्चे और पुरुष सभी पगड़ी बांधकर चलेंगे। साथ ही गुलाल के साथ होली भी खेलेंगे। गणेश उत्सव शहरवासियों के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र