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B’day Spcl: सियासी बुद्धि के साथ एक ऐसा राजनेता जिसका किसी के पास कोई तोड़ नहीं

2004 से 2014 तक देश में दस वर्षों तक कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में देश में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की सरकार रही. इस कार्यकाल में टूजी और कोयला घोटाले जैसी सियोसी घटनाओं ने देश में कांग्रेस विरोधी लहर को जन्म दिया. इसी लहर पर सवार होकर 2014 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी और नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने. बीजेपी के इस प्रचंड जीत में उत्तर प्रदेश की अहम भूमिका रही, जिसने 80 में से 73 सीटें बीजेपी की झेली में डाल दी.

यूपी में इस प्रचंड जीत ने नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने में तो अहम भूमिका निभाई ही, साथ ही उनके विश्वासपात्र और तत्कालीन यूपी प्रभारी अमित शाह ने भी देश की राजनीति में एक जबरदस्त एंट्री मारी. 26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद की शपथ लिए और कुछ ही दिन बाद नौ जुलाई को अमित शाह बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए.

चुनावी राज्यों में बीतता है अधिकांश समय
राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद अमित शाह लगातार पार्टी को एक के बाद एक कई राज्यों में जीत दिलाई. बीजेपी की इस जीत में पीएम मोदी का चेहरा और शाह की रणनीति का अहम योगदाना माना जाता है. रणनीति बनाने के साथ-साथ अमित शाह पार्टी के लिए लगातार मेहनत करते हैं. वह लगभग प्रत्येक दिन पार्टी के पदाधिकारियों के साथ बैठक और जनसंपर्क करते हैं. हर सप्ताह उनकी किसी ना किसी प्रदेश में रैली होती है. चुनाव के समय उनका अधिकांश समय उसी राज्य में बीतता है, जहां चुनाव होने हैं.

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बीते गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान इसकी बानगी देखने को मिली थी. बीजेपी को जीत दिलाने के लिए वह लगभग दो महीने तक लगातार गुजरात में डेरा जमाए हुए थे. इस दौरान वह दिन को कार्यकर्ता सम्मेलन करते थे और देर रात तक बैठकें करते थे. अक्सर देर रात तीन बजे तक बैठकों का दौर जारी रहता था. गृह राज्य होने के बावजूद उनका अधिकांश समय बीजेपी कार्यालय और पार्टी के मीडिया सेंटर में बीतता था.

संगठन को मजबूत करने के लिए वह अक्सर कार्यकर्ताओं को संबोधित कर उनको उर्जावान बनाए रखने की कोशिश करते हैं. यह वजह है कि विधानसभा चुनाव हारने के बावजूद वह कुछ ही दिनों बाद पश्चिम बंगाल पहुंचते हैं और कार्यकर्ताओं के घर खाना खाते हैं.

अमित शाह का जीवन
22 अक्टूबर 1964 को मुंबई में एक व्यापारी परिवार में जन्मे अमित शाह ने अहमदाबाद से बॉयोकेमिस्ट्री से बीएससी की पढ़ाई की. जब वह 14 वर्ष के थे उसी समय वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ गए थे. कहा जाता है कि कॉलेज के दिनों में ही उनकी मुलाकात नरेंद्र मोदी से हुई थी. 1982 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े. कुछ ही समय बाद उन्हें बीजेपी की अहमदाबाद इकाई का सचिव बनाया गया. 1997 में उन्हें पार्टी के युवा मोर्चा का कोषाध्यक्ष बनाया गया.

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1995 में पहली बार विधायक बने अमित शाह
अमित शाह 1995 में पहली बार सरखेज विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए. 1998 में सरखेज से ही अपने प्रतिद्वंद्वी को 1,32,477 मतों के अंतर से हराकर दोबारा विधायक निर्वाचित हुए. 2002 में भी वह रिकॉर्ड 1,58,036 मतों से सरखेज विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतने में सफल रहे थे. 2007 में हुआ गुजरात विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपने ही रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए 2,32,823 वोट से चुनाव जीतने में सफल रहे थे. 2012 में वे नरनपुरा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़े और लगातार पांचवी जीत दर की. इसी वर्ष वह राज्यसभा सांसद बने.

अमित शाह गुजरात स्टेट चेस एसोसिएशन के अध्यक्ष और गुजरात राज्य क्रिकेट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष भी रहे. गुजरात में जब दोबारा नरेंद्र मोदी की सरकार बनी, तब उन्हें राज्य मंत्रिमंडल में शामिल किया गया और गृह मंत्रालय सहित कई जिम्मेदारियां सौंपीं गई.

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