
कैंसर दुनिया भर में हर साल होने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में से एक है। आज कैंसर जानलेवा बीमारी वैश्विक (Cancer Risk) स्तर पर तेजी से फैल रही है और कैंसर के नए मामले लगातार बढ़ रहे हैं। भारत भी इस खतरे से अछूता नहीं है – भारत में भी यह बीमारी तेजी से फैल रही है।
आंकड़ों के अनुसार देखा जाये तो भारत में साल 2019 में करीब 12 लाख नए कैंसर के मामले सामने आये है , जबकि इसी साल करीब 9.3 लाख लोगों की कैंसर के कारण मौत हुई। यह संख्या एशिया में कैंसर से होने वाली मौतों में भारत को दूसरे स्थान पर रखती है।
चिंता की बात यह है कि कैंसर अब खासकर युवाओं और महिलाओं को ज्यादा प्रभावित कर रहा है। हाल ही में सामने आए आंकड़ों से यह भी पता चला है कि महिलाओं में दो तरह के कैंसर बहुत तेजी से फैल रहे हैं और मौत का प्रमुख कारण बन रहे हैं।
ग्लोबोकैन डेटा से चौंकाने वाले खुलासे
स्तन कैंसर भारतीय महिलाओं में सबसे आम कैंसर बन गया है।(Cancer Risk) ग्लोबोकैन 2020 के अनुसार, भारत में कुल कैंसर के मामलों में स्तन कैंसर का योगदान 13.5% है, जबकि कुल कैंसर से होने वाली मौतों में इसका योगदान 10.6% है। अनुमान है कि हर 28 में से एक महिला को अपने जीवनकाल में इस बीमारी का सामना करना पड़ सकता है।
कैंसर का बढ़ता हुआ ग्राफ: हर साल लाखों मौतें
भारत में कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। 2022 में कैंसर की वजह से 9 लाख से ज़्यादा मौतें हुईं और करीब 14 लाख नए मामले सामने आए। यह स्थिति न सिर्फ़ चिंताजनक है बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती भी है।

युवतियों में भी बढ़ रहा है खतरा
पहले माना जाता था कि कैंसर उम्र से जुड़ी बीमारी है, लेकिन अब 20 साल की उम्र में भी युवतियों में ब्रेस्ट कैंसर के मामले देखने को मिल रहे हैं। महिलाओं में विशेष रूप से स्तन कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। इसके पीछे कारण है देर से मातृत्व कम स्तनपान , और हार्मोनल असंतुलन, जो स्तन कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा, आंतों के माइक्रोबायोमकी सेहत भी कैंसर के जोखिम को प्रभावित करती है। शरीर में स्वस्थ बैक्टीरिया के संतुलन में गड़बड़ी कैंसर के विकास को बढ़ावा दे सकती है। अंततः, अनुवांशिक कारक भी कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे जिम्मेदार हैं।

टाटा मेमोरियल की रिपोर्ट ने खोली आंखें
टाटा मेमोरियल सेंटर, मुंबई और वाराणसी के शोधकर्ताओं ने बायोमेड सेंट्रल पब्लिक हेल्थ जर्नल में प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि (Cancer Risk) भारत में ज्यादातर महिलाएं समय पर जांच नहीं कराती हैं। इसके कारण कैंसर का पता तब चलता है जब यह गंभीर अवस्था में पहुंच चुका होता है।
केवल 1% महिलाएं ही जांच करवाती हैं
रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में 45 वर्ष से अधिक आयु की केवल 1% महिलाएं ही स्तन कैंसर की जांच करवाती हैं।
राज्यवार आंकड़ों से पता चला:
- केरल: 4.5%
- कर्नाटक: 2.9%
- आंध्र प्रदेश: 0.1%
- उत्तराखंड: 0.27%
- नागालैंड: 0%

मैमोग्राम: जल्दी पता लगाने का एक सरल तरीका
मैमोग्राम एक प्रकार का एक्स-रे है जो स्तन ऊतक और कैंसर में होने वाले परिवर्तनों का जल्दी पता लगाने में मदद करता है। कैंसर का जल्दी पता लग जाना और उसकी जाँच और अधिक प्रभावी बनाता है। यू.एस. प्रिवेंटिव सर्विसेज टास्क फोर्स के अनुसार, 40-75 वर्ष की आयु की महिलाओं को हर साल मैमोग्राम करवाना चाहिए। अगर किसी महिला को उच्च जोखिम है – जैसे धूम्रपान, शराब का सेवन या पारिवारिक इतिहास – तो 40 वर्ष की आयु से पहले जांच करवाना उचित हो सकता है।
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शुरुआती लक्षणों को खुद कैसे पहचानें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि 20 वर्ष से अधिक आयु की सभी महिलाओं को नियमित रूप से अपने स्तनों की खुद जांच करनी चाहिए। यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:
- स्तन के आकार में बदलाव
- गांठ जैसा महसूस होना
- निप्पल से स्राव आना
- लगातार दर्द होना
स्तन कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए महिलाओं के लिए सतर्क रहना बहुत जरूरी है। समय पर जांच और शुरुआती पहचान से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को हराया जा सकता है।