MRSAM मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया है. इस घातक मिसाइल का परीक्षण INS विशाखापत्तनम से किया गया है. यह एक बार लॉन्च होने के बाद आसमान में सीधे 16 KM तक टारगेट को गिराने में सक्षम है. इसकी रेंज आधा किलोमीटर से लेकर 100 किलोमीटर तक है.
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भारतीय नौसेना (Indian Navy) ने मिसाइल के क्षेत्र में बड़ी कामयाबी हासिल की है. नेवी ने मीडियम रेंज की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल MRSAM यानी मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल का सफल परीक्षण किया है. इस दमदार मिसाइल का परीक्षण INS विशाखापत्तनम से हुआ है. यह एक ऐसी एंटी शिप मिसाइल है जो दुश्मनों के जहाज को मिनटों में तबाह कर सकती है. परीक्षण के दौरान MRSAM ने टारगेट पर एकदम सटीक निशाना साधा.
MRSAM मिसाइल पूरी तरह से भारत में निर्मित मिसाइल है. इसके निर्माण के साथ ही देश आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ चुका है. इस मिसाइल को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्री (IAI) ने मिलकर BDL हैदराबाद में विकसित किया है. परीक्षण के विवरण को साझा करते हुए भारतीय नौसेना ने कहा, ‘MRSAM को DRDO और IAI ने संयुक्त रूप से विकसित किया है, और BDL में उत्पादित यह मिसाइल भारतीय नौसेना की आत्मनिर्भर भारत के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है.’
क्या है मिसाइल की खासियत
MRSAM को सितंबर 2021 में भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल किया गया था. इस मिसाइल की खासियत की बात करें तो यह हवा में एक साथ आने वाले कई टारगेट्स या दुश्मनों पर 360 डिग्री घूम कर एक साथ हमला करने में सक्षम है. मिसाइल 100 किलोमीटर के दायरे में आने वाली किसी भी मिसाइल, लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, ड्रोन, निगरानी विमानों और हवाई दुश्मनों को मार गिराने में पूरी तरह सक्षम है. दुश्मन की सही जानकारी के लिए इसमें कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम, रडार सिस्टम, मोबाइल लांचर सिस्टम, एडवांस्ड लांग रेंज रडार, रीलोडर व्हीकल और फील्ड सर्विस व्हीकल आदि को शामिल किया गया है.
यह मिसाइल इजरायल की खतरनाक मिसाइल काफी हद तक बराक-8 परआधारित है. इसका वजन लगभग 275 किलोग्राम तक है. यह मिसाइल लॉन्च होने के बाद धुआं कम छोड़ती है और एक बार लॉन्च होने के बाद MRSAM आसमान में सीधे 16 KM तक टारगेट को गिरा सकती है. अगर रेंज की बात करें तो यह आधा किलोमीटर से लेकर 100 किलोमीटर तक वार कर सकती है. इसकी रफ्तार 680 मीटर प्रति सेकेंड यानी 2448 किलोमीटर प्रतिघंटा तक है. इसकी रफ्तार ही इसे ज्यादा खतरनाक बनाती है.
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