राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती को पूरे देश में स्वच्छता दिवस के तौर पर मनाया जा रहा है

देशभर में आज महात्मा गांधी की जयंती को स्वच्छता दिवस के तौर पर मनाया जा रहा है. बापू ने स्वच्छता अभियान का यह सपना 1903 में काशी में देखा था. जानें पूरी कहानी…

News jungal desk : राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती को पूरे देश में स्वच्छता दिवस के तौर पर मनाया जा रहा है । और बापू ने काशी में ही स्वच्छता अभियान का सपना देखा था । 1903 में पहली बार बापू जब काशी आए थे और यहां की तंग गलियों से होकर काशी विश्वनाथ मंदिर जा रहे थे । और तब गलियों और मन्दिर के आस पास गंदगी देख वो विचलित हो गए थे ।

हालांकि उस वक्त उन्होंने इस बारे में कोई चर्चा नहीं की थी । लेकिन मन्दिर के आसपास की गंदगी देख वो काफी नाराज हुए थे. 1916 में बीएचयू के स्थापना दिवस के मौके पर जब वो काशी आए तो उन्होंने खुले मंच से इस बात का जिक्र किया है । अपने भाषण में महात्मा गांधी ने कहा कि मैं बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए गया था । और जिन गलियों से मैं उस महान मन्दिर में जा रहा था, उस मन्दिर में कोई अजनबी अचानक आ जाए तो वो इन दुर्व्यवस्था को देख हिंदुओं के बारे में क्या सोचेगा. अगर वो हमारी निंदा करेगा तो वो गलत होगा ।

आजादी से पहले स्वच्छता की मुहिम
करीब 107 साल पहले महात्मा गांधी का खुले मंच से ये सम्बोधन बताता है कि आजादी के पहले से ही बापू ने देश में स्वच्छता अभियान की लड़ाई को छेड़ रखा था. बीएचयू के पूर्व प्रोफेसर कौशल किशोर मिश्र ने बताया कि महात्मा गांधी दूरदर्शी थे. उस समय से ही वो इस बात को समझते थे और लोगों को भी स्वच्छता के लिए प्रेरित करते थे.उनके भाषण के शब्द इसके प्रमाण हैं.

11 बार काशी दौरे पर आए थे बापू
बता दें कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी अपने पूरे जीवन काल के दौरान कुल 11 बार काशी दौरे पर आए थे. पहले और दूसरे दौरे के दौरान वो काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करने गए थे. कामोवेश दोनों बार एक जैसी तस्वीर ही उन्हें मंदिर और गलियों में देखने को मिली थी. इसी बात को लेकर वो नाराज दिखे थे.

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